प्राविधिक शिक्षा विभाग में नियमों को ठेंगा दिखाने वाले चमत्कारिक अधिकारी और विशेष कृपा का खेल
लखनऊ।
प्राविधिक शिक्षा विभाग में इन दिनों एक नाम सबसे अधिक चर्चा में है, वह नाम है कंप्यूटर विभागाध्यक्ष श्री आत्म प्रकाश सिंह। विभाग के गलियारों में इन्हें माननीय प्राविधिक शिक्षा मंत्री श्री आशीष पटेल का बेहद खास और विशेष कृपा पात्र माना जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इन्हें ऐसे चमत्कारिक पुरुष की संज्ञा दी जा रही है जिन पर नियमों और शासनादेशों से ऊपर उठकर हमेशा विभाग की मेहरबानी बनी रही है।
अटैचमेंट गैंग के मुख्य सूत्रधार
विभागीय सूत्रों के अनुसार प्राविधिक शिक्षा विभाग में जो अटैचमेंट गैंग सक्रिय है, उसके मुख्य सूत्रधार यही माननीय अधिकारी हैं। यह निदेशालय में बैठकर मनचाहे अटैचमेंट, मनचाही संस्थाओं का अतिरिक्त प्रभार और मनचाहा अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का खेल खेल रहे हैं। चमत्कारिक पुरुष का दर्जा प्राप्त होने के कारण निदेशालय या शासन के किसी भी अधिकारी में इन पर उंगली उठाने का साहस नहीं है। माननीय मंत्री जी की असीम कृपा के बल पर यह निदेशालय में बैठकर व्यावहारिक रूप से निदेशक का कार्य संभाल रहे हैं और सारे प्रशासनिक निर्णय स्वयं ले रहे हैं।
नियमों के उल्लंघन और कारनामों की लंबी सूची
जब विभाग में अन्य कर्मचारियों को पार्ट टाइम एनओसी या वैधानिक अवकाश तक मिलना दुश्वार होता था, तब श्री सिंह को एमएनआईटी इलाहाबाद से एमटेक करने के लिए पूर्ण वेतन के साथ अवकाश स्वीकृत किया गया था। विडंबना यह है कि आज यही अधिकारी स्वयं निदेशालय में बैठकर दूसरों की एनओसी रद्द करने में लगे हैं।
इन्होंने महर्षि विश्वविद्यालय से वर्ष 2020 में अपनी पार्ट टाइम पीएचडी पूरी की, जबकि उस विश्वविद्यालय में पार्ट टाइम पीएचडी का पाठ्यक्रम ही वर्ष 2019 में शुरू हुआ था। मात्र एक वर्ष में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर लेना इनकी विलक्षण क्षमता को दर्शाता है।
उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद इनके ज्ञान का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र छात्राओं को नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि इनकी तैनाती हमेशा लखनऊ और कानपुर जैसे महानगरों में ही रहती है। जब तत्कालीन प्रमुख सचिव ने इनके अटैचमेंट से इनकार कर दिया था, तब माननीय मंत्री जी ने स्वयं फाइल पर हस्ताक्षर कर इनका अटैचमेंट जारी करवाया था।
नियमानुसार निदेशालय कानपुर या आईआरडीटी कानपुर में अधिकतम 3 वर्ष की तैनाती का प्रावधान है। सामान्य अधिकारियों को पूरी सेवा में एक बार भी यहाँ अवसर मिलना कठिन होता है, परंतु श्री सिंह आईआरडीटी कानपुर में दो बार और निदेशालय कानपुर में तीन बार पदस्थापित हो चुके हैं।
आईआरडीटी कानपुर में तैनाती के दौरान एनईपी के तहत सिलेबस निर्माण में ऐसी चूक हुई कि परीक्षा के समय तक छात्रों को यह स्पष्ट नहीं था कि संबंधित विषय की परीक्षा होनी है या नहीं। आनन फानन में टाइम टेबल में बदलाव कर परीक्षा कार्यक्रम में विषय जोड़ा गया, लेकिन मंत्री जी की कृपा के कारण इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पदोन्नति और सेवा शर्तों पर सवाल
शासनादेश के अनुसार निदेशालय में अधिकतम 3 वर्ष की तैनाती का नियम है, जिसका उल्लंघन कर इन्हें तीसरी बार पदस्थापित किया गया। इसके अतिरिक्त प्रधानाचार्य पद की डीपीसी के लिए आवश्यक 16 वर्षों के शिक्षण अनुभव के स्थान पर मात्र 9 वर्षों का शिक्षण अनुभव होने के बावजूद इनका नाम डीपीसी के लिए प्रस्तावित किया गया है। विभाग के योग्य शिक्षकों और जनता का सवाल है कि पदोन्नति और तैनाती की सीढ़ियाँ पारदर्शी नियमों से तय होंगी या व्यक्तिगत प्रभाव से।
मुख्यमंत्री से कार्रवाई की गुहार
प्राविधिक शिक्षा विभाग में जारी अवैध अटैचमेंट, मनमाने प्रभार और सिंडिकेट के नेटवर्क को शिक्षा तंत्र के लिए कैंसर के समान बताया जा रहा है। इससे एक ओर जहाँ सरकारी खजाने को नुकसान पहुँच रहा है, वहीं दूर दराज के विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।
विभागीय निष्पक्ष अधिकारियों और शिक्षकों ने माननीय मुख्यमंत्री जी से माँग की है कि आत्म प्रकाश सिंह एवं उनके पूरे सिंडिकेट के खिलाफ तत्काल उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच समिति गठित की जाए। सालों से लखनऊ और कानपुर में जमे सभी अवैध संबद्धीकरणों को तुरंत रद्द कर अधिकारियों को मूल संस्थानों में भेजा जाए। इसके अलावा स्पेशल टेक्निकल सेल के नाम पर किए जा रहे वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों की विशेष ऑडिट कराई जाए तथा स्थानांतरण नीति का उल्लंघन करने वालों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।




