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क्रिश्चियन डिग्री कॉलेज में सतर्कता जागरूकता कार्यक्रम, छात्रों को दिलाया सत्यनिष्ठा और भ्रष्टाचार मुक्त भारत का संकल्प

निरीक्षक अजीत कुमार यादव ने विद्यार्थियों एवं फैकल्टी को किया जागरूक, बोले—न रिश्वत दें, न रिश्वत लें; भ्रष्टाचार की करें शिकायत

लखनऊ। केंद्रीय सतर्कता आयोग के निर्देशन में 26 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक देशभर में सतर्कता जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान की ओर से विभिन्न सरकारी एवं शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी अभियान के अंतर्गत निरीक्षक अजीत कुमार यादव, सतर्कता अधिष्ठान, उत्तर प्रदेश, लखनऊ ने लखनऊ के प्रसिद्ध क्रिश्चियन डिग्री कॉलेज पहुंचकर छात्र-छात्राओं एवं फैकल्टी को भ्रष्टाचार के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया साथ ही पंपलेट का भी वितरण किया गया।

कार्यक्रम के दौरान निरीक्षक अजीत कुमार यादव ने ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ विषय पर व्याख्यान देते हुए विद्यार्थियों एवं कॉलेज के कर्मचारियों को ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि न तो रिश्वत दें और न ही रिश्वत लें। यदि कोई व्यक्ति रिश्वत की मांग करता है, तो उसके विरुद्ध संबंधित सतर्कता विभाग को शिकायत करें।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार समाज के लिए दीमक के समान है, जो सामाजिक एवं प्रशासनिक संस्थाओं को भीतर से खोखला कर देता है। भ्रष्टाचार के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंद व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाता। कई बार भ्रष्ट लोक सेवकों द्वारा सरकारी योजनाओं के लाभ में बाधा उत्पन्न की जाती है, पात्र लाभार्थियों को उनके अधिकारों से वंचित किया जाता है और सरकारी धन के दुरुपयोग की स्थिति पैदा होती है।

निरीक्षक अजीत कुमार यादव ने बताया कि सतर्कता विभाग का प्रमुख उद्देश्य भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना, सरकारी धन के दुरुपयोग एवं रिसाव को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने व्यक्तिगत जीवन, सामाजिक व्यवहार और भविष्य के व्यावसायिक कार्यों में सत्यनिष्ठा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

उन्होंने कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शासन-प्रशासन के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की ईमानदारी और जिम्मेदारी भी आवश्यक है। भारत सरकार के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त कार्यसंस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने यह भी बताया कि भ्रष्टाचार में कमी आने से देश में निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार होता है, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित करने, आर्थिक विकास को गति देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायता मिलती है।

कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के विरुद्ध सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा गया कि भारत को डेनमार्क, फिनलैंड और सिंगापुर जैसे उन देशों की श्रेणी में पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करने होंगे, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार नियंत्रण एवं पारदर्शी प्रशासन के लिए जाना जाता है।

सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और जवाबदेही ही सुशासन की आधारशिला हैं। जब शासन-प्रशासन में ईमानदारी और समाज में नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता मिलेगी, तभी सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा और देश आर्थिक एवं सामाजिक रूप से अधिक सशक्त बनेगा।

कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की ईमानदारी, जागरूकता और सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।

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