मौलाना कल्बे जवाद नक़वी के सम्मान समारोह में दिखी हिंदुस्तान की धड़कन
ईरान द्वारा शिया धर्म गुरु मौलाना सय्यद कल्बे जवाद साहब को इंटरनेशनल ख़ुमैनी अवार्ड से किया सम्मानित

लखनऊ, देश में आपसी सौहार्द, अमन-शांति, एकता, सांस्कृतिक विवधता और गंगा-जमुनी तहज़ीब का समागम हिंदुस्तान की धड़कन को दर्शाता है और 1 फ़रवरी 2026 (इतवार) को दोपहर 12:30 बजे, ऐतिहासिक छोटा इमामबाड़ा, हुसैनाबाद, लखनऊ में एक अज़ीमुश्शान जलसा-ए-आम के आयोजन में कुछ ऐसा ही देखने को मिला जहाँ हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समाज के प्रमुख धर्मगुरु, संत-महात्मा, उलमा और सामाजिक प्रतिनिधि एक मंच पर उपस्थित दिखाई दिए।

यह जलसा विशेष रूप से ईरानी राष्ट्रपति के हाथों इंटरनेशनल अवार्ड से सम्मानित मौलाना कल्बे जवाद नक़वी साहब के सम्मान में आयोजित किया गया जहाँ न सिर्फ उन्हें मुबारकबाद पेश की गयी बल्कि उनके धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक योगदान पर वक्ताओं द्वारा प्रकाश डाला गया। लखऊ के छोटे इमामबाड़ा में आयोजित यह आयोजन किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं रहा बल्कि देश की एकता और आपसी भाईचारे का साझा मंच दिखाई दिया। समारोह में मौलाना कल्बे जवाद नक़वी की लंबे समय से चली आ रही सेवाओं की सराहना की गई, जिनके माध्यम से उन्होंने भारत में इमाम ख़ुमैनी के क्रांतिकारी विचारों, इस्लामी जागरूकता, मुस्लिम एकता सोच को बढ़ावा दिया है ।
समारोह में ऑल इंडिया न्यूज़पेपर एसोसिएशन, आईना के संस्थापक सदस्य डॉ मोहम्मद कामरान द्वारा आयोजन में आये हुए सभी लोगों को सम्बोधित करते हुए बताया कि भारत के प्रमुख लोकप्रिय शिया धर्मगुरु तथा मजलिस-ए-उलमा-ए-हिन्द के महासचिव, हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सैयद कल्बे जवाद नक़वी को ईरान का पहला अंतरराष्ट्रीय इमाम ख़ुमैनी पुरस्कार दिया गया। यह सम्मान उन्हें भारत में इमाम ख़ुमैनी के विचारों, सिद्धांतों और उनके विचारों को प्रभावी रूप से फैलाने के लिए दिया गया है। यह पुरस्कार एक भव्य समारोह में ईरान के राष्ट्रपति डॉ मसऊद पीज़िशक्यान और इमाम ख़ुमैनी के पोते हुज्जतुल इस्लाम सय्यद हसन ख़ुमैनी के हाथों दिया गया। इस अवसर पर ईरान की कई प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक हस्तियाँ मौजूद थीं, जिनमें इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनेई के सलाहकार आयतुल्लाह मोहसिन क़ुम्मी भी शामिल थे। इस पुरस्कार के लिए प्रथम चरण में पूरी दुनिया से लाखों लोगों में केवल 6000 लोगों को चयनित किया गया और फिर 15 लोगों के अति बुद्धिजीवी सदस्यों की समिति द्वारा मौलाना कल्बे जव्वाद की लंबे समय से चली आ रही समाज सेवाओं, शिक्षा आदि के क्षत्रो में किये गए सराहनीय कार्यों एवं भारत में इमाम ख़ुमैनी के क्रांतिकारी विचारों, इस्लामी जागरूकता, मुस्लिम एकता के लिए किये गए कार्यो हेतु चयन किया गया हो हिन्दुस्तन के लिए फ़क्र की बात है। उन्होंने कहा कि आज जब समाज में नफ़रत और विभाजन की कोशिशें हो रही हैं, ऐसे समय में इस तरह के आयोजन अमन और इंसानियत का मजबूत संदेश देते हैं। समारोह में मौजूद अधिवक्ता, सामजसेवी सय्यद हामिद ने बताया कि ईरान व हिन्दुस्तान की सैकड़ों साल पुरानी दोस्ती आज भी बाकी है जिसका सबूत यह है कि 80 मुल्कों के नुमायन्दों के बीच जिन चन्द मुल्कों का नाम इतने बड़े एवार्ड देने को प्रोग्राम बना उसमें हिन्दुस्तान का नाम भी शामिल किया गया है, ईरानी हुकूमत इस एवार्ड के ज़रिये हिन्दू मुस्लिम इत्तिहाद का पैगाम देकर यह पैगाम दिया है कि हम इन्सानियत के तरफ़दार हैं और उसके दोस्त हैं और जुल्म के ख़िलाफ़ हैं।
समारोह में अनेक शिया धर्मगुरों के अलावा हजरत सैयद फजलुल मन्नान रहमानी, शाही इमाम, टीले वाली मस्ज़िद, हजरत जैनुल हैदर अल्वी, नायाब सज्जादानशीन, दरगाह काकोरी शरीफ, हजरत एजाज अली मीनाई, सज्जादा नशीन, दरगाह हज़रत मखदूम शाहमीना शाह, पूज्य भंते श्री दीपांकर जी, श्री स्वामी सारंग महाराज, एडवोकेट सुरेश पांडे, पूर्व अध्यक्ष लखनऊ बार एसोसिएशन, श्री प्रितपाल सिंह सरोज, प्रवक्ता, आम आदमी पार्टी, श्री अशोक सिंह, सदस्य आईसीसी, श्री अनुपम मिश्रा, राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय लोकदल, डॉक्टर नितेंद्र यादव, राष्ट्रीय प्रवक्ता, समाजवादी पार्टी आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहें। कार्यक्रम का मीडिया संचालन आमिर साबरी द्वारा बख़ूबी किया गया और बताया गया कि हम लोग ईरानी हुकूमत का शुक्रिया अदा करते हैं जिन्होंने अपनी दोस्ती का सुबूत देते हुए इमामे ख़ुमैनी अज़ीमोशान एवार्ड मौलाना कल्बे जवाद साहब को दिया कार्यक्रम में सुन्नी, शिया, हिन्दू, सिक्ख, ईसाई भाई गंगा जमुना तहजीब व मोहब्बत का सुबूत देते हुए नुमाया शख्सियत मौजूद हैं जिन्होंने यहाँ पर आकर मौलाना कल्बे जवाद साहब को जो एवार्ड मिला उसकी मुबारकबाद दते हुए हिन्दुस्तान की धड़कन को दिखाया है.




