उत्तर प्रदेश

पत्रकारिता की गरिमा और सामाजिक दायित्व निर्वहन को समर्पित संवाद

आचार संहिता और अनुशासन पर सख्त रुख

विशेष जाति या धर्म की नहीं बल्कि समस्त पत्रकारों की पुनर्गठित समिति –
संयोजक प्रभात त्रिपाठी का स्पष्ट संदेश

अनुशासन,संयमित भाषा और आचार संहिता पर जोर,
पत्रकार हितों के संरक्षण को लेकर एक वर्ष की उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण

लखनऊ। पत्रकारिता की गरिमा, मर्यादा और सामाजिक जिम्मेदारी को केंद्र में रखते हुए उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) की एक आवश्यक बैठक लालबहादुर शास्त्री भवन एनेक्सी मीडिया सेंटर में आयोजित हुई। बैठक में पत्रकार हितों के संरक्षण, अनुशासन, भाषा संयम और आचार संहिता के पालन पर बल देते हुए एक वर्ष के संघर्ष, प्रयासों और उपलब्धियों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया।
उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) की एक महत्वपूर्ण एवं आवश्यक बैठक आज लालबहादुर शास्त्री भवन एनेक्सी स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित की गई। बैठक का नेतृत्व समिति के संरक्षक एवं संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर पत्रकारिता के मूल्यों, मर्यादाओं और पत्रकारों के दीर्घकालीन हितों पर गंभीर एवं सार्थक चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समिति का गठन किसी जाति, धर्म या वर्ग विशेष के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए किया गया है। उन्होंने दो टूक कहा कि समिति का मंच जातिगत या धार्मिक विमर्श का स्थान नहीं है और न ही भविष्य में इसे बनने दिया जाएगा।
प्रभात त्रिपाठी ने समिति के एक वर्ष के कार्यकाल का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार पत्रकारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को लेकर लगातार प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि पत्रकार पेंशन योजना को लेकर समिति ने मुख्यमंत्री से औपचारिक आग्रह किया था। देश के कई राज्यों में पत्रकारों को पेंशन का लाभ मिल रहा है और उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी यह योजना मार्च 2026 तक लागू होनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि 2026 के भीतर समिति द्वारा रखी गई प्रमुख मांगें पूरी होंगी।
संयोजक ने पत्रकारिता की गिरती भाषा शैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता को वह मंदिर की तरह देखते हैं, जहां शब्दों की पवित्रता और गरिमा सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी परिसरों का उपयोग निजी या असंगत कार्यों के लिए नहीं होना चाहिए। साथ ही सभी पत्रकारों से अपील की कि वे मर्यादित भाषा का प्रयोग करें, अपशब्दों और आरोपात्मक शैली से बचें, क्योंकि इससे पत्रकारिता की साख को ठेस पहुंचती है।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि समिति में अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी पत्रकारों से आचार संहिता का पालन करने, भाषा पर नियंत्रण रखने और समाज में पत्रकारों की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए जिम्मेदार आचरण अपनाने का आह्वान किया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button