उत्तर प्रदेशलखनऊ

विकास नगर अग्निकांड: राख में बसी जिंदगियों को फिर से संवारने में जुटी ‘सपनों की उड़ान’ फाउंडेशन, खुशी पांडे का सेवा संकल्प बना पीड़ितों का सहारा

लखनऊ । राजधानी लखनऊ के विकास नगर इलाके में बीते दिनों लगी भीषण आग ने दर्जनों गरीब परिवारों की जिंदगी पल भर में तबाह कर दी। झुग्गियों और कच्चे मकानों में रहने वाले लोग देखते ही देखते बेघर हो गए। घर का सामान, बच्चों की किताबें, पहचान के दस्तावेज और सालों की गाढ़ी कमाई सब कुछ आग की लपटों में स्वाहा हो गया। हादसे के बाद से पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे राख के ढेर में अपनी जिंदगी के बचे-खुचे निशान तलाश रहे हैं। दो वक्त की रोटी का इंतजाम भी इनके लिए अब सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

 

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को घर से जरूरी सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। महिलाएं बच्चों को गोद में लेकर भागीं, बुजुर्ग किसी तरह जान बचाकर बाहर निकले। दमकल की गाड़ियां पहुंचने तक कई झोपड़ियां पूरी तरह जल चुकी थीं। इलाके में चीख-पुकार और मातम का माहौल था। जिन लोगों ने मजदूरी कर-कर के एक-एक सामान जोड़ा था, उनके सामने अब सिर्फ स्याह राख बची है।

इस भयावह मंजर के बीच लखनऊ सपनों की उड़ान फाउंडेशन की अध्यक्ष खुशी पांडे पीड़ितों के लिए मसीहा बनकर सामने आईं। हादसे की खबर मिलते ही खुशी पांडे अपनी टीम के साथ विकास नगर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू कर दिया। पिछले एक हफ्ते से वह लगातार मौके पर मौजूद रहकर प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचा रही हैं।

शुरुआती दिनों में उन्होंने बच्चों के लिए स्कूल बैग, स्टेशनरी, कॉपी-किताबें और कपड़े बांटे। पीने के पानी की व्यवस्था कराई ताकि गर्मी में लोगों को दिक्कत न हो। जैसे-जैसे जरूरत समझ में आई, मदद का दायरा बढ़ता गया। रविवार को फाउंडेशन की तरफ से हर परिवार को पूरे महीने का राशन बांटा गया। इसमें आटा, चावल, दाल, तेल, मसाले और नमक की बोरियां शामिल थीं।

खुशी पांडे ने कहा, “यह हादसा बहुत दर्दनाक है। जिन लोगों की आंखों के सामने उनकी पूरी जिंदगी जल गई, उनका दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। हमसे जितना बन पड़ेगा, हर संभव मदद करेंगे। यह एक दिन का काम नहीं है। जब तक लोग फिर से अपने पैरों पर खड़े नहीं हो जाते, सपनों की उड़ान फाउंडेशन उनके साथ खड़ी रहेगी।”

खुशी पांडे ने घटनास्थल पर पहुंचकर एक-एक पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने बुजुर्गों के सिर पर हाथ रखकर हिम्मत बंधाई, महिलाओं से बात कर उनका दुख समझा और बच्चों को चॉकलेट देकर मुस्कुराने की वजह दी। कई महिलाएं उनसे लिपटकर रो पड़ीं। लोगों ने बताया कि हादसे के बाद प्रशासन की मदद पहुंची, लेकिन निरंतर साथ खुशी पांडे और उनकी टीम ही दे रही है।

स्थानीय निवासी रामदीन ने बताया, “आग में हमारा सब कुछ चला गया। दो दिन तो भूखे ही सोए। खुशी दीदी ने न सिर्फ राशन दिया, बल्कि मेरे बेटे की जल गई किताबों की जगह नई कॉपियां और बैग भी दिया। वह रोज आकर पूछती हैं कि कोई तकलीफ तो नहीं।” वहीं सुमित्रा देवी ने कहा, “ऐसी बेटी सबके घर हो। जब कोई नहीं दिखा तो इन्होंने आकर संभाला। हर दुख-सुख में साथ खड़ी हैं।”

ओल्ड एज होम’ का सपना भी हुआ साकार

पीड़ितों की मदद के बीच खुशी पांडे ने एक और खुशखबरी साझा की। उन्होंने बताया कि उनका लंबे समय से एक ओल्ड एज होम खोलने का सपना था, जो अब पूरा हो गया है। लखनऊ में फाउंडेशन का वृद्धाश्रम शुरू हो चुका है। यहां उन बुजुर्गों को सहारा मिलेगा जिनके पास कोई नहीं है।

खुशी पांडे ने कहा, “सेवा ही हमारा मकसद है। विकास नगर के लोग हों या अनाथ बुजुर्ग, असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए सपनों की उड़ान फाउंडेशन हमेशा तत्पर रहेगी। हमारा प्रयास है कि कोई भी भूखा न सोए और कोई भी खुद को अकेला न समझे।” उन्होंने बताया कि वृद्धाश्रम में भोजन, दवाइयों और देखभाल की पूरी व्यवस्था की गई है।

फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं के मुताबिक विकास नगर में अभी भी बहुत काम बाकी है। कई परिवारों के पास तन ढकने को ढंग के कपड़े नहीं हैं। बच्चों की पढ़ाई छूट गई है क्योंकि स्कूल का सामान जल गया। गर्मी बढ़ने से टिन शेड या प्लास्टिक के नीचे रहना मुश्किल हो रहा है। फाउंडेशन अब अस्थायी शेल्टर और तिरपाल की व्यवस्था में भी जुट गया है। साथ ही जिन लोगों के आधार कार्ड, राशन कार्ड जैसे दस्तावेज जल गए हैं, उन्हें दोबारा बनवाने में मदद की योजना है।

खुशी पांडे ने शहर के लोगों से भी अपील की है कि वे आगे आकर इन परिवारों की मदद करें। “आपके घर में रखे पुराने कपड़े, बर्तन, बच्चों की किताबें किसी की नई जिंदगी की शुरुआत बन सकते हैं। छोटी मदद भी इनके लिए बहुत बड़ी है,” उन्होंने कहा।

सपनों की उड़ान फाउंडेशन की योजना विकास नगर के बच्चों के लिए विशेष क्लास चलाने की भी है ताकि आग की वजह से उनकी पढ़ाई का नुकसान न हो। इसके अलावा महिलाओं के लिए स्वरोजगार कैंप लगाने पर भी विचार किया जा रहा है जिससे वे फिर से आर्थिक रूप से सक्षम हो सकें।

विकास नगर का अग्निकांड कई परिवारों के लिए बदनसीब रात बनकर आया। मगर इस अंधेरे में खुशी पांडे और उनकी टीम उम्मीद की रोशनी लेकर पहुंची है। राशन की बोरी हो या बच्चे का स्कूल बैग, हर छोटी-बड़ी मदद इन उजड़े हुए घरों में दोबारा जिंदगी बसाने का हौसला दे रही है। ‘सपनों की उड़ान’ फाउंडेशन का यह संकल्प बताता है कि इंसानियत के जज्बे से बड़ी से बड़ी आपदा का सामना किया जा सकता है। खुशी पांडे का कहना है कि यह सेवा का सिलसिला रुकने वाला नहीं है। जब तक आखिरी परिवार अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता, उनकी टीम विकास नगर की इन गलियों में मौजूद रहेगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button