उत्तर प्रदेश

“हमारा सपना-तम्बाकू मुक्त हो प्रदेश अपना” विश्व तम्बाकू निषेध दिवस-31मई 2026

तम्बाकू एक ऐसा जहर है जो हम सब जानते-समझते हुए भी अपनी खुशी से इस्तेमाल कर रहे हैं..अपनी सेहत और जिन्दगी को दांव पर लगा कर बिना लाभ और हानि का विश्लेषण किये लगातार सेवन कर रहे हैं..कैंसर जैसे असाध्य रोग को निमन्त्रण दे रहे हैं..धूम्रपान और तम्बाकू का चबाना दोनों कितने घातक हैं इसका उदाहरण है वो मौतें जो तम्बाकू के अन्धाधुन्ध सेवन से हो रही हैं..उत्पादों पर वैधानिक स्वास्थ्य सम्बन्धित चेतावनी लिखी है और चित्र के माध्यम से भयभीत भी करती है किन्तु उपभोग में दिन पर दिन बढोत्तरी ही हो रही है बिना डरे..
विदित हो कि लगभग 24 करोड की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में करीब 7.10 करोड वयस्क लोग किसी न किसी रूप में तम्बाकू उत्पाद का सेवन कर रहे हैं(52% पुरुष एवं 18% महिलायें) जो वयस्क आबादी का 29% है। धूम्रपान एवं अन्य तम्बाकू उत्पादों के सेवन से लोगों में कैंसर तथा अन्य गम्भीर बीमारियां व अकाल मृत्यु /अपंगता पायी जा रही हैं। देश में तम्बाकू जनित गम्भीर बीमारियों से प्रति वर्ष लगभग 13 लाख लोगों की मौत हो जाती है जो एक गम्भीर चिंता का विषय है।
अवयस्कों एवं कम उम्र के बच्चों को तम्बाकू उत्पादों की उपलब्धता पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य मंत्रालय,बाल विकास मंत्रालय,खाद्य सुरक्षा एवं मानक मंत्रालय तथा प्रदेश सरकारों ने कठोर कानूनों का निर्माण कर इस बुराई को रोकने के गम्भीर प्रयास किये हैं,आवश्यकता है जन जागरूकता की-स्व चेतना की। तम्बाकू उत्पादों के हानिकारक प्रभावों को देखते हुए कई राज्य सरकारों द्वारा अपने सम्बन्धित नगर पालिका अधिनियम एवं विनिमय के अन्तर्गत तम्बाकू उत्पादों के भंडारण,प्रसंस्करण तथा विक्रय को खतरनाक व आक्रामक व्यापार की श्रेणी के तौर पर सूचीबद्ध किया है।

तम्बाकू का इतिहास:-
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तम्बाकू पौधे की पत्तियों से प्राप्त होता है। यह मादक मादक और उत्तेजक पदार्थ है, “निकोशियाना” जाति के पौधे की बारीक कटी हुई पत्तियां,जोकि खाने-पीने और सूंघने के काम आतीं हैं से प्राप्त होता है।किसी अन्य मादक और उत्तेजक पदार्थ की अपेक्षा तम्बाकू का प्रयोग आज सबसे अधिक मात्रा में किया जा रहा है।
भारत में तम्बाकू का पौधा “पुर्तगालियों” द्वारा 1608ई.में लाया गया था और तब से इसकी खेती का क्षेत्र भारत के लगभग सभी भागों में फैल गया है! भारत विश्व में तम्बाकू उत्पादन का लगभग 8.7 प्रतिशत उत्पन्न करता है।
तम्बाकू की उत्पत्ति कब और कहाँ हुई इसका ठीक पता नहीं चलता किन्तु कहते हैं कि एक बार पुर्तगाल स्थित फ्रांसीसी राजदूत “जाॅन निकोट” ने अपनी रानी के पास तम्बाकू का बीज भेजा,तभी से इसका प्रवेश प्राचीन संसार में हुआ! “निकोट” के नाम से इसकी खेती ऐतिहासिक काल से होती चली आ रही है।
यद्यपि तम्बाकू “अयनवृत्तीय पौधा” है पर इसकी सफल खेती अन्य स्थानों पर भी होती है,क्योंकि यह अपने को विभिन्न प्रकार की भूमि और जलवायु के अनुकूल बना लेता है!
भारत में तम्बाकू का आगमन:- ऐसा माना जाता है कि 17वीं शताब्दी में पुर्तगालियों द्वारा भारत में तम्बाकू की खेती का आरम्भ हुआ। यूरोपीय यात्रियों ने 18वीं सदी में तम्बाकू की खेती का उल्लेख किया है। मुगल बादशाह “जहांगीर” के समय में तम्बाकू की खेती का विस्तार नहीं हो पाया,क्योंकि उसकी घोषणा थी कि तम्बाकू पीने वालों के होंठ कटवा दिये जायेंगे।
व्हाइटलाॅ आइन्स्ली की लिखी “मेटिरिया इंडका” नामक पुस्तक में देशी तथा यूरोपीय डाक्टरों द्वारा भारत में दवा सम्बन्धित प्रयोजनों के लिए तम्बाकू के उपयोग के बारे में लिखा है।

तम्बाकू उत्पादों का स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
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तम्बाकू के सेवन से 30 गुना तक फेफड़े तथा अन्य प्रकार के कैंसर का खतरा बढ जाता है।
पुरुषों में नपुंसकता को दो गुना तक बढ़ाता है तम्बाकू का सेवन!
तम्बाकू के सेवन से दमा की सम्भावना 3 गुना तक बढ जाती है।
धूम्रपान करने वालों में ह्रदय रोग की बढ जाती है,कोरोनरी धमनी रोग होने का खतरा 2-4 गुना,दिल के दौरे का जोखिम 2-6 गुना तथा पेरिफेरल धमनी के रोग का जोखिम 10 गुना अधिक हो जाता है।
तम्बाकू का उपयोग प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। पुरुषों में बांझपन का जोखिम 60: से अधिक तक बढ़ सकता है एवं महिलाओं में प्रजनन क्षमता में 30: की कमी का कारण तम्बाकू उत्पादों का सेवन ही है।
सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पादों का अत्याधिक उपभोग मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है जिसमें अवसाद,चिंता,आत्महत्या की भावना इत्यादि मानसिक विकारों को बढ़ाता है।
तम्बाकू चबाना व सिगरेट के अधिक उपयोग से श्वास संबंधित बीमारियों जैसे ब्रोंकाइटिस,वातस्फीति और अस्थमा की सम्भावना बढ़ जाती है।
एक अध्ययन से पता चलता है कि 10 में से 9 वयस्क 18 वर्ष की आयु से पहले शुरु करते हैं तम्बाकू का सेवन।
वर्ष 2017-18 में एक अध्ययन के अनुसार भारत में 35 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में तम्बाकू से होने वाला स्वास्थ्य व्यय लगभग 1लाख 78 हज़ार करोड रुपये था।
तम्बाकू का सेवन आहारनाल,मूत्राशय,गुर्दे इत्यादि खेल कैंसर का खतरा भी बढ़ता है।

सिगरेट तथा अन्य तम्बाकू उत्पादों के सेवन से होने वाली स्वास्थ्य सम्बन्धित परेशानियों का सीधा असर हमारे परिवार पर पड़ता है,कई बार ऐसा भी होता है कि हम अपने प्रिय जन के स्वास्थ्य लाभ के प्रयास में अपनी गाढी कमाई का एक एक पैसा लगा देतें हैतो कभी कभी जमीन-जायदाद सब बीक जाती है फिर भी व्यक्ति को हम नहीं बचा पाते हैं। तम्बाकू उत्पाद के सेवन के फलस्वरूप होने वाली मानसिक विकार परिवार में कलह का कारण भी बन जाते हैं।

तम्बाकू के प्रयोग से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाकर,साक्ष्य आधारित नीतियों को अपनाकर और व्यक्तियों को ईसाई लत को छोड़ने का मार्गदर्शन देकर, हम भावी भारत के युवाओं के एक बेहतर स्वस्थ भविष्य प्रदान कर सकते हैं।

कोटपा एक्ट–2003
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भारत सरकार ने मई-2003 में सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद(विज्ञापन और प्रतिबंध और व्यापार,वाणिज्य,उत्पादन, आपूर्ति तथा वितरण) अधिनियम 2003(सीओटीपीए या कोटपा) लागू किया था। फरवरी 2004 में भारत ने तम्बाकू नियंत्रण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के “फ्रेमवर्क कन्वेंशन” की भी पुष्टि करी थी।
तम्बाकू विरोधी जन माध्यम अभियान को सक्रिय करना,तम्बाकू उद्योग की निगरानी और नियमन, सार्वजनिक स्थलों को 100% धूम्रपान मुक्त करना,नई कराधान नीतियों को लागू करना,व्यापक अभियान जिससे शिक्षा संस्थानों,पुलिस, स्वास्थ्य, हॉस्पिटैलिटी(सत्कार),परिवाहन आदि को तम्बाकू मुक्त किया जा सके।
सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम 2003..प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष सेवन से होने वाले दुष्प्रभाव के प्रति लोगों को जागरूक और उनका बचाव करना है। यह अधिनियम तम्बाकू उत्पाद प्रतिबंध एवं चेतावनी सम्बन्धित विज्ञापन,वाणिज्य व व्यापार तथा आपूर्ति एवं वितरण पर लागू होगा।

धारा–4….सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध-बस स्टैंड, रेलवे-स्टेशन,हास्पिटल,न्यायालय परिसर,शैक्षिक संस्थान,कैन्टीन-कैफे,बैंक,क्लब, होटल,रेस्टोरेंट के आसपास खुले स्थलों पर भी प्रतिबंध है।
दण्ड:-इसके उलंघन पर 200 रुपए का जुर्माना लगाया जायेगा।
धारा–5….सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विज्ञापन,प्रोत्साहन व प्रेरित करने पर प्रतिबंध।
दण्ड:- 1000/ रुपए जुर्माना या 2 वर्ष सश्रम कारावास या दोनों।
धारा–6ए….सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद को 18 वर्ष तक के बच्चों के द्वारा बिक्री पर प्रतिबंध।
धारा–6बी….शैक्षणिक संस्थानों के 100 यार्ड के दूरी तक सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद की बिक्री पर प्रतिबंध।
दण्ड:-इसके उलंघन पर 200 रुपए का जुर्माना लगाया जायेगा।
धारा–7….उत्पाद के रैपर पर 85% चित्रित चेतावनी एवं डरावनी फोटो का विज्ञापन आवश्यक है।

अधिकृत व्यक्ति–सब इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी इस पेनाल्टी के लिए अधिकृत है,यदि व्यक्ति पेनाल्टी से इन्कार करता है तो आपराधिक एक्ट-1973 के धारा 25 एवं 28 के अन्तर्गत दण्डनीय होगा।
कोटपा..एक ऐसा सक्त कानून है जिसके पूर्ण क्रियान्वयन से तम्बाकू के प्रयोगकर्ताओं की संख्या पर असर पड़ना चाहिए था,किन्तु ऐसा हो न सका।

नगर निगम,लखनऊ–आदेश-2018 “वेंडर लाइसेंस/अनुज्ञप्तिधारक तम्बाकू विक्रेता नियम”
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उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए,जनहित में किसी भी प्रकार के तम्बाकू उत्पाद का विनिर्माण(किसी भी विधी द्वारा),विपणन,भंडारण, पैकिंग,प्रसंस्करण एवं सफाई लखनऊ नगर निगम क्षेत्र के अन्तर्गत बिना लाइसेंस/अनुज्ञप्ति अथवा अनुमति के प्रतिबंधित है।साथ ही लाइसेंस/अनुज्ञप्तिधारक तम्बाकू विक्रेता उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 का सख्ती से पालन करते हुए सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम COTPA-2003,खाद्य संरक्षण अधिनियम 2006 एवं बाल विकास मंत्रालय का किशोर न्याय(बाल देखभाल और संरक्षण)अधिनियम 2015 का उल्लंघन नहीं करेंगे तथा तम्बाकू उत्पाद की दूकानों पर टाॅफी,कैंडी,चिप्स,बिस्कुट,पेय पदार्थ इत्यादि की बिक्री नहीं करेंगे।
यदि कोई व्यापारी/दुकानदार/व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ उपयुक्त कानून के अनुरूप दण्डात्मक कार्यवाई की जायेगी।
सभी तरह के तम्बाकू या तम्बाकू उत्पाद बेचने वाले व्यापारी/दुकानदार लखनऊ नगर निगम से लाइसेंस/अनुज्ञप्ति अथवा अनुमति प्राप्त कर तम्बाकू उत्पाद की बिक्री कर सकता है।

तम्बाकू मुक्त अभियान में मीडिया की भूमिका
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मीडिया/प्रेस के समर्थन और सक्रिय सहयोग से हम अपने अभियान को गति प्रदान कर सकते हैं। बीडी-सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पादों से होने वाली गम्भीर बीमारियों के प्रति लोगों को सचेत करने का एक प्रमुख ज़रिया मीडिया बन सकता है। युवा वर्ग इस बुराई की गिरफ्त में आने से किस तरह बच सकता है इस पर भी अपने कार्यक्रमों के द्वारा मीडिया अभियान में सहायक बन सकता है।
आने वाले समय में हम सभी का पूरा प्रयास होगा कि अपने इस अभियान के तहत चलाये जा रहे कार्यक्रमों और जन जागरूकता अभियानों की पूरी कवरेज मीडिया तक पहुंचाये। तम्बाकू के दुष्प्रभाव की कहानियाँ मीडिया के माध्यम से जन मानस तक पहुँचाने का प्रयास हो ताकि इस बुराई से ग्रसित व्यक्ति खुद ब खुद तम्बाकू का सेवन छोड़े। क्योंकि स्व प्रेरणा या संकल्प से यदि हम किसी बुराई से बचने का प्रयास करते हैं तो सफलता 100% मिलनी सुनिश्चित हो जाती है।
सार्वजनिक स्थानों और स्कूल-कालेजों के आसपास धड़ल्ले से हो रही तम्बाकू उत्पादों की बिक्री की खबरें मीडिया में आने से सरकारी तंत्र तत्काल कार्यवाही करने को विवश होता है। ऐसे में हम उन स्थानों को चिन्हित कर मीडिया तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे जहां पर तम्बाकू नियंत्रण को लेकर बने कानूनों का मखौल उड़ाया जा रहा है।
वेंडर लाइसेंसिंग की दिशा में भी मीडिया का पूरा समर्थन हासिल किया जा सकता है। चोरी छिपे बसों-ट्रेनों में हो रही तम्बाकू उत्पादों की बिक्री को भी मिडिया के ज़रिए उजागर कर नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है।
भारत सरकार के स्वच्छता अभियान को भी थोड़ी-थोड़ी दूरी पर चल रही तम्बाकू उत्पादों की दुकानें बट्टा लगा रहीं हैं,क्योंकि बीड़ी-सिगरेट की टोटियां और गुटखा व पान मसाले की पीक इस अभियान पर एक धब्बे की तरह है।
अतः निसंदेह यह कहा जा सकता है कि तम्बाकू मुक्त अभियान को सफल करने में मीडिया एक अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान प्रदान कर सकता है,जन-जन तक यह संदेश भेजने में कि तम्बाकू सेवन की बुराई से हमारी युवा पीड़ी बर्बाद हो रही है और असमय ही काल के गाल में समा रही है,यह जागरूकता पैदा करने में मीडिया का महती योगदान हो सकता है।

तम्बाकू मुक्त अभियान–हम क्या करें:-
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अगर हम शिक्षक,प्रशिक्षक हैं तो विद्यालय के प्रत्येक छात्र को इसके सेवन करने से बचायें और शिक्षा संस्थानों को तम्बाकू मुक्त करायें!
अगर हम सामुदायिक या सामाजिक संगठन हैं तो अपने कार्यक्रमों/योजनाओं से प्रत्येक परिवार को तम्बाकू उत्पाद के नुकसानों के प्रति अवश्य जागरूक करें!
अगर हम शासकीय,अशासकीय,औद्योगिक संस्थान तथा निजी संस्थान में कार्यरत अधिकारी,पदाधिकारी या कर्मचारी हैं तो अपने संस्थान को तम्बाकू मुक्त परिसर घोषित करने में अभियान टीम का सहयोग करें!
अगर हम मीडिया से किसी प्रकार से जुड़े हैं तो तम्बाकू उत्पाद के उपयोग से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के प्रति समुदाय को जागरूक करें!

तम्बाकू मुक्त अभियान का प्रचार-प्रसार अपनी फेसबुक/ट्विटर/टेलीग्राम या अन्य सोशल मीडिया के द्वारा करें!
कोटपा अधिनियम-2003 के अनुपालन हेतु सरकारी अथवा गैरसरकारी विभागों का यथासंभव सहयोग करें!
अपने घर,परिसर व स्वमं से जुड़े सार्वजनिक स्थानों को तम्बाकू निषिद्ध क्षेत्र घोषित करें!
सिगरेट तथा अन्य तम्बाकू उत्पादों का प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से प्रचार-प्रसार या विज्ञापन से संवर्धन प्रायोजित न करें!
किसी भी तम्बाकू उत्पाद का प्रयोग अथवा बिक्री नाबालिग द्वारा न होने पाये,यह सुनिश्चित करें!

सरकार,जिला प्रशासन और नगर निगम से अपेक्षा
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शिक्षा विभाग—समस्त शिक्षक बन्धु,विद्यालय प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी गण यह सुनिश्चित करें की विद्यालय के 100 गज की दूरी पर सिगरेट या अन्य तम्बाकू उत्पादों की बिक्री ना हो तथा विद्यालय परिसर में कोई भी शिक्षक या कर्मचारी तम्बाकू उत्पाद का सेवन ना करे।
परिवहन विभाग—बसों तथा बस अड्डों पर तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगे। सिगरेट या अन्य तम्बाकू उत्पादों के प्रयोग से होने वाली हानि व बीमारियों और सम्बन्धित प्रावधानों/कानूनों की जानकारी डिस्प्ले बोर्ड पर लगाई जायें।
तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ—विभाग के अधिकारी व कर्मचारी जन कोटपा एक्ट-2003 का उल्लंघन करने वालों पर दण्डात्मक कार्यवाई करने हेतु टास्क फोर्स/छापा दल को अपने स्तर पर निरन्तर अभियान चलाने का निर्देश दें। विषेशकर रेस्तरां-होटल आदि में होने वाले हुक्काबारों की जांच नियमित रूप से करी जाये।
पुलिस विभाग—जनपद में कोटपा एक्ट 2003 के उल्लंघन करने पर पुलिस कार्रवाई को अभिलेखों में दर्ज कर,क्राइम रिपोर्ट के प्रपत्र पर दर्शाने की प्रक्रिया शुरु कर विधिसम्मत कानून का अनुपालन करवायें।
उद्योग बन्धु/व्यापार मण्डल—सभी संगठन अपने व्यपारिक परिसर व बाजार क्षेत्र में नारे-स्लोगन युक्त फ्लैक्स बनवाकर लगवाएं।
सूचना विभाग—तम्बाकू मुक्त अभियान से जुड़ी गतिविधियों,उदेश्यों व कार्यक्रमों की खबरें को मीडिया द्वारा अधिक से अधिक स्थान मिले,सुनिश्चित करें!
स्वास्थ्य विभाग—तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ,जिला चिकित्सालय व नगर स्वास्थ्य अधिकारी की नियमित बैंठके हों तथा मॉनिटरिंग की उचित व्यवस्था हो। स्वास्थ्य विभाग तथा सामाजिक संगठनों व निजी संस्थानों के साथ सामंजस्य पूर्वक अभियान को संचालित करने हेतु समन्वय समिति बनायें!

नगर निगमों,नगर पंचायतों से अपेक्षा— कोटपा-2003 अधिनियम के प्रावधानों/नियमों का कठोरता से अनुपालन करवाना सुनिश्चित करें।
“वेंडर लाइसेंसिंग” नियम के माध्यम से अपने परिक्षेत्र में सिगरेट तथा अन्य तम्बाकू उत्पादों की बिक्री विधिसम्मत कराने की व्यवस्था करें।
तम्बाकू मुक्त अभियान की सफलता हेतु सामाजिक संगठनों,सरकारी विभागों,गैर सरकारी व निजी संस्थानों से सहयोग लेते हुए वेंडर लाइसेंसिंग के प्रति जागरूकता का प्रयास सुनिश्चित करें।
सम्मानित जन प्रतिनिधियों,पार्षदों व सामाज के जिम्मेदार लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।

तम्बाकू मुक्त अभियान-31 जुलाई 2017 को पिताश्री स्व.पंडित रामप्यारे त्रिवेदी जी के आशीर्वाद से मैंने आरम्भ किया था! मैंने खुद गुटखा खाना छोड़ा था सर्वप्रथम।
तत्कालीन उ.प्र. के गवर्नर मा.राम नाईक जी,श्रीमान ह्रदय नारायण दीक्षित जी-मा.अध्यक्ष विधान सभा,उ.प्र. एंव श्री रमेश भईया जी-विनोबा सेवा आश्रम,शाहजहांपुर की गरिमामय उपस्थित में शुभारंभ हुआ था।

तम्बाकू मुक्त अभियान-उत्तर प्रदेश अब मेरे जीवन की विभिन्न गतिविधियों में से एक है,मैं प्रयासरत हूँ।

आप यदि स्वंम सेवन करते हों तो तुरंत छोड़िए..
अपने परिवार के सदस्यों और स्वजनों को इस बुराई से अवगत करायें तथा उन्हें तम्बाकू उत्पाद के प्रयोग करने से रोकिए!
कम उम्र के बच्चों को इसका सेवन करने से तुरंत रोकिए,यह घातक है! बच्चों के भविष्य का प्रश्न है।

तम्बाकू उत्पादों के सामाजिक दुष्प्रभावों और स्वास्थ्य पर होने वाली गम्भीर बीमारियों के प्रति जागरूक करने में आप एक महती भूमिका का निर्वाहन कर अपनी नैतिक जिम्मेदारी का अनुपालन करें!

सरकार द्वारा अथवा अन्य सामाजिक संगठनों के द्वारा हो रहे प्रयासों में अपना यथासंभव योगदान करें,यह राष्ट्रीय कर्त्तव्य है। आपके सक्रिय सहयोग की अपेक्षा में!

हम होंगे कामयाब एक दिन..मन में है विश्वास..पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन…
बढ़ते कदम…बढ़ते चलो..बढ़ते चलो !

लेखक–ज्ञानी त्रिवेदी

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