महिला दिवस पर कुछ खास
नाम रजनी वर्मा, जन्मस्थान बाराबंकी १५ अगस्त १९९३ में हुआ, मेरे पिता जी (श्री ओम प्रकाश वर्मा) जो कि गाना और बांसुरी बहुत अच्छा गाते बजाते थे पिता जी बिजली विभाग में पोस्टेड थे माता(शांति वर्मा)जो की गृहणी |
बचपन से डांस करना अच्छा लगता था मुझे, मेरे पिता जी भी मेरे साथ कभी कभी नृत्य करते थे ।
स्कूल अवध विद्या मंदिर से कक्षा १ की पढ़ाई किया २ से ५ तक इंडियन कॉन्वेंट स्कूल बाराबंकी,९ से १२ तक झाबेर बा इण्टर स्कूल बी ए के पढ़ाई पटेल डिग्री कॉलेज से और एम ए सोशियोलॉजी गंगा डिग्री कॉलेज बाराबंकी, ।
मुझे बचपन से शौख था डांस करने का मेरे पिता जी ने मेरा एडमिशन एक डांस स्कूल में करवाया छुट्टियों में मैंने सीखा वंहा डांस । मैं नृत्य प्रतियोगिता ,स्कूल में फंक्शन कभी नहीं छोड़ती थी । लेकिन मेरा मन था मैं पुलिस में जाऊँ क्यूंकि मुझे पुलिस से बहुत डर लगता था । मैं जब कक्षा ९ में आई तो उन दिनों छुट्टियाँ चल रही थी । मैं एक भाई (रविन्द्र कुमार) और चार सिस्टर है । मेरी माँ ने बोला रजनी तुम ढोलक सीख लो मैंने बोला ठीक मैंने अपना एडमिशन करवा लिया (बाहर सुगम संगीत प्रभाग में) वंहा प्रभात नारायण दीक्षित जो कि मेरे गुरु जी हैं उनसे मैंने ढोलक सीखना सुरु किया उन्होंने बोला रजनी आप बहुत स्पीड में ढोलक सीख रही हो तुम तबला सीख लो फिर मैंने अपना एडमिशन तबला में करवा लिया श्री मधुकर तिवारी गुरु जी से मैंने तबला सीखा,फिर बोले आपकी आवाज अच्छी है आप को गाना सीखना चाहिए मैंने उनसे गाना सीखना सुरु कर दिया । फिर एक दिन उनके जन्म दिन पर मैंने डांस किया तो प्रभात सर आप कथक डांस सीखिए उसमे आप खूब आगे जाओगी फिर प्रभात सर ने मेरा एडमिशन भातखंडे विश्व विद्यालय लखनऊ में करवा दिया उस समय मैं बी ए प्रथम वर्ष में थी मैं पहेले कॉलेज जाती थी मैंने संगीत विषय लिया था और स्कूल से आने के बाद भातखंडे सीखने लखनऊ जाती थी मेरी पहेली गुरु डॉ रुचि खरे रही । मैं समाज सेवा भी करने लगी मैं लोगों को फ्री डांस सिखाना ढोलक सिखाना ये सब करना मुझे अच्छा लगता था और मैं सीख भी रही थी २०११ में मुझसे प्रभात सर ने बोला dewan महोत्सव में आपको कथक की प्रस्तुति देना है मैंने दिया पहेली बार इतने बड़े मंच पर प्रस्तुति देकर और मुझे सम्मानित भी किया gya मैं बहुत खुश फिर महादेवा महोत्सव में मौका मिला ayese धीरे धीरे मेरा मन लगता gya । एक दिन मेरे साथ घटना घटी २९/०९/२०१२मैं बस से जा रही थी मेरा एक्सीडेंट हो gya मेरा banya हाथ फेक्चर हो गया ।
मुझे लगा मैं अब डांस नहीं कर पाऊँगी
और अक्टूबर महीने में dewan महोत्सव मुझे लगा मैं नहीं कर पाऊँगी लेकिन मैंने एक महीने के अंदर dewan महोत्सव में अपनी प्रस्तुति दिया और किसी को नहीं pta चला कि मेरा हाथ में कहीं से कोई दिक्कत हो। बाराबंकी में मिनिस्टी एस नायर डी एम आई २०१२ में उन्होंने बोला मेरी बेटी को कथक सीखा दीजिए
मैंने क़रीब १२ साल उनकी बेटी को डांस सिखाया ।इसके साथ ही साथ आई ए एस सत्रोहण वैश्य सर की बेटी को कथक नृत्य सिखाया । आई ए एस अखिलेश तिवारी सर,आई ए एस अनीता भटनागर जैन maam को सिखाया ।
इन सभी लोगों का सपोर्ट रहा। २०१३ में मेरा एन एस एस के ज़रिए जिला लेवल में गाँव गाँव जाकर नृत्य सिखाया ढोलक सिखाया ।मैंने बाल विकाश पुस्ताहार में भी २ साल बच्चों को सिखाया । फिर मेरा मंडल लेवेल पर सिलेक्शन हुआ फिर स्टेट लेवल पर फिर नेशनल लेवल पर सिलेक्शन हुआ धीरे धीरे हौसला मिलता gya मुझे सबसे ज़्यादा सपोर्ट मेरी माँ ने दिया आज हम जो भी है और जन्हा भी सिर्फ़ अपनी माँ की वजह से, भातखंडे यूनिवर्सिटी एम पी ए डॉ कुम कुम धर maam के अंडर में किया साथ साथ मैं गुरु कथक सुरेंद्र सैकिया सर से कथक नृत्य सीखा असली कथक नृत्य क्या है वो गुरु जी ने मुझे बताया ।
सुबह २ घंटा प्रैक्टिस करने के बाद लखनऊ गुरु जी घर पर सीखते थे उसके भातखंडे जाती थी मैं उसके बाद कथक केंद्र में मैं सीखती थी उसके बाद मिनिस्टीmam की बेटी को सिखाकर बाराबंकी में ट्यूशन डांस सिखाती थी ९ बजे तक घर पहुंचते थे उसके बाद भोजन करने के बाद फिर २ घंटा रियाज करने के बाद हम सोते थे भातखंडे से मैंने लोकनृत्य की सिक्षा प्राप्त किया गुरु मोहित सर से हारमोनियम कमला कांत सर से सीखा मैंने ।राज्यपाल द्वारा सम्मानित २०१८ में एम पी ए में कांस्य पदक से सम्मानित किया gya मुझे, धीरे धीरे मुझे मौका मिलता gya दैनिक जागरण महोत्सव अमर उजाला महोत्सव । २०२३ में मेरी शादी फिक्स हुई लखनऊ से मिस्टर अमृतेंद्र कुमार वर्मा जी से जो कि बाराबंकी सूरतगंज भिखम पुर बेसिक विद्यालय के प्रधाना चर्या हैं । शादी के बाद मुझे फुल सपोर्ट मिला हसबैंड और सास माँ का फुल सपोर्ट है इसलिए आज मैं लोगों तक अपने कथक नृत्य और लोक नृत्य के शिक्षा दे रही हूँ । ए सी एस मुकेश कुमार मेशराम सर के सपोर्ट से मैंने अपने कथक को और ज़्यादा लोगों तक पहुंचाया और जिले से बाहर भी प्रस्तुतियां दिया मैंने । मेरा सपना है कि अपने कथक और लोक नृत्य को इंटर नेशनल लेवल तक सिखाऊँ क्यों की मुझे डांस सिखाना बहुत अच्छा लगता है ।
संक्षिप्त परिचय =मैं लखनऊ पब्लिक स्कूल में पार्ट टाइम जॉब करती हूँ और यू पी संगीत नाटक अकैडमी में कथक prachiksha के रूप में बच्चों को कथक की शिक्षा दे रहे हैं
२०१२ से अब तक
नेशनल यूथ फेस्टिवल अवार्ड
राज्यपाल द्वारा २०१८ में कांस्य पदक से सम्मानित
हिंदी इंग्लिश
हिंदी इंग्लिश टाइपिंग करना पसंद है
टीचिंग experience १८ साल
लखनऊ पब्लिक २०१९ से अब तक
संगीत नाटक एकेडमी कथक केंद्र २०२२ से अब तक
सागर नरचर २०१७ से २०१८
बाहर सुगम संगीत २०१२ से २०१५ तक नृत्य सिखाया मैंने




