*समाचार का बड़ा असर: क्लास-1 ट्रांसफर में धांधली की खबर के बाद झुका विभाग, क्लास-2 के लिए अपनानी पड़ी ऑनलाइन मेरिट पॉलिसी*
हमारे समाचार पत्र की खोजी और निष्पक्ष पत्रकारिता का एक बार फिर बड़ा असर देखने को मिला है। माननीय मंत्री आशीष पटेल जी के विभाग (प्राविधिक शिक्षा ) में क्लास-1 अधिकारियों के स्थानांतरण (तबादलों) में हुई गंभीर धांधली को जब हमारे समाचार पत्र ने प्रमुखता से उजागर किया, तो विभाग में हड़कंप मच गया। इस खुलासे का ऐसा व्यापक असर हुआ है कि अब विभाग को बैकफुट पर आना पड़ा है और क्लास-2 अधिकारियों के ट्रांसफर के लिए पारदर्शी ऑनलाइन मेरिट बेस्ड प्रक्रिया को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
*शासनादेशों को मानने पर मजबूर हुए आला अफसर*
गौरतलब है कि क्लास-1 के अधिकारियों के ट्रांसफर में नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई थी। हमारे समाचार पत्र द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद माननीय मंत्री जी, प्रमुख सचिव महोदय एवं डायरेक्टर जनरल को आखिरकार झुकना पड़ा। अब विभाग को मजबूर होकर उत्तर प्रदेश सरकार के मूल शासनादेशों के अनुसार ऑनलाइन मेरिट बेस्ड ट्रांसफर प्रक्रिया को लागू करने का फैसला लेना पड़ा है।
इस नए फैसले के तहत अब जल्द ही क्लास-2 अधिकारियों के ट्रांसफर पूरी तरह से मेरिट बेस्ड ऑनलाइन पॉलिसी के तहत किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और योग्य अधिकारियों के साथ अन्याय न हो।
*क्या पूरी ईमानदारी से लागू होगी यह प्रक्रिया?*
विभाग ने चौतरफा दबाव के बाद ऑनलाइन पॉलिसी अपनाने का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इस प्रक्रिया को विभाग वाकई पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से अपनाता है? या फिर क्लास-1 की तरह इसमें भी पर्दे के पीछे से कोई खेल खेलने की कोशिश की जाएगी? हमारी टीम इस पूरी प्रक्रिया पर बारीक नजर बनाए रखेगी।
*जातिगत सिंडिकेट और द्वेष भावना पर योगी सरकार के एक्शन का इंतजार*
क्लास-1 के अधिकारियों के स्थानांतरण में जिस तरह से एक खास ‘जातिगत सिंडिकेट’ हावी रहा और कुछ विशेष जातियों के प्रति द्वेष भावना निकालकर उनका उत्पीड़न किया गया, उसे हमारे समाचार पत्र ने तथ्यों के साथ जनता के सामने रखा था। अब देखना यह है कि भ्रष्टाचार और भेदभाव पर ज़ीरो टॉलरेंस की नीति रखने वाली **योगी सरकार** इस धांधली और जातिगत सिंडिकेट पर क्या कड़ा कदम उठाती है। इस पूरे घटनाक्रम और सरकार की कार्रवाई पर भी हमारी पैनी नजर रहेगी।
अनिल तिवारी
बेबाक लेखक




