*प्राविधिक शिक्षा विभाग में ‘जातिगत तानाशाही’ और स्थानांतरण महाघोटाला, नियम तोड़ने वालों को मलाई और ईमानदार दलितों एवं अन्य वर्ग को प्रताड़ना*
प्राविधिक शिक्षा विभाग में स्थानांतरण नीति-2026 तार-तार, रसूखदारों को ‘अंगद’ जैसी पोस्टिंग
विभागीय स्तर से लीक हुए सनसनीखेज दस्तावेजों के अनुसार, स्थानांतरण नीति के प्रावधानों का खुला उल्लंघन कर चहेते अधिकारियों को बार-बार घूम-फिरकर उन्हीं जिलों में भेजा जा रहा है जहाँ वे पहले से दशकों तक जमे हुए थे। नीति विरुद्ध रसूख का लाभ लेने वाले प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
* **श्री संजीव सिंह:** लखनऊ में पहले ही 20 वर्ष से अधिक की लंबी सेवा दे चुके इस अधिकारी पर विभाग इतना मेहरबान है कि इन्हें पुनः लखनऊ में ही बनाए रखा गया। इतना ही नहीं, नियमों को दरकिनार कर इन्हें प्रधानाचार्य पद के साथ-साथ **सचिव, संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद (JEECUP)** का भी दोहरा प्रभार सौंप दिया गया है।
* **श्री इंद्रजीत सचान (विभागाध्यक्ष, राजकीय पॉलीटेक्निक, लखनऊ):** शासकीय नियमों का खुला मखौल उड़ाते हुए ये महाशय पिछले 20 से अधिक वर्षों से निरंतर राजधानी लखनऊ में ही अंगद के पैर की तरह जमे हुए हैं।
* **श्री पी.के. सिंह (प्रधानाचार्य, राजकीय महिला पॉलिटेक्निक, वाराणसी):** झांसी मंडल में पहले ही 20 से अधिक वर्षों तक तैनात रहने का रिकॉर्ड बनाने वाले इस अधिकारी का जब दोबारा ट्रांसफर हुआ, तो नियमों को ताक पर रखकर इन्हें फिर से झांसी मंडल के राजकीय पॉलीटेक्निक, तालबेहट (ललितपुर) की मलाईदार पोस्टिंग दे दी गई।
*श्री पी.एन. जायसवाल (विभागाध्यक्ष, केमिकल):** कानपुर में 10 से अधिक वर्षों की लंबी तैनाती का लुत्फ उठाने के बाद नीति के विरुद्ध दोबारा घूम-फिरकर इन्हें राजकीय पॉलीटेक्निक, कानपुर में ही नई पोस्टिंग की सौगात दे दी गई है।
*श्री आत्म प्रकाश सिंह (विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस):** नियमों को दरकिनार कर इनका संबद्धीकरण (अटैचमेंट) और पोस्टिंग का पहिया लगातार केवल लखनऊ और कानपुर के बीच ही घूमता रहता है।
*श्री बी.एन. चौधरी (प्रधानाचार्य):** स्थानांतरण नीति के स्पष्ट प्रावधानों के विपरीत इनका स्थानांतरण एम.एम.आई.टी. (MMIT), गोरखपुर में किया गया है, जो सीधे तौर पर भारी अनियमितता की ओर इशारा करता है।
गंभीर आरोपों के बाद भी ‘अभयदान’, दागी अधिकारियों पर आक्रोश
विभाग में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उच्छृंखलता के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों को खुला संरक्षण मिल रहा है:
*श्री प्रवेश वर्मा (विभागाध्यक्ष / प्रभारी प्रधानाचार्य, राजकीय पॉलीटेक्निक, मोहम्मदी, लखीमपुर):** इनके ऊपर लगे भयंकर आरोपों और तत्कालीन जाँच रिपोर्ट के आधार पर अब तक कोई दंडात्मक कार्यवाही न किए जाने से जनसामान्य और कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। आरोपी पर शिकंजा कसने के बजाय उसे संस्था का सर्वेसर्वा बनाए रखने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अवैध ‘संबद्धीकरण’ (Attachment) का सिंडिकेट और ‘विशेष तकनीकी सेल’ पर गहराया शक
विभाग के भीतर बिना किसी वैधानिक आधार के मूल तैनाती से हटाकर चहेतों को अन्यत्र संबद्ध करने का एक बड़ा नेटवर्क चल रहा है। नियमों को ताक पर रखकर किए गए इन अटैचमेंट्स के घेरे में विभाग के कई रसूखदार नाम शामिल हैं:
* **श्री विकल्प कुमार सिंह**
* **श्री अवधेश पटेल**
* **श्री कमल कुमार**
* **श्री रोहित कटियार**
* **श्री जितेन्द्र यादव**
* **श्रीमती रश्मि सोनकर**
**श्री जीतेन्द्र मौर्या **
**श्री विवेकानंद **
*श्री अलोक कुमार*
इन सभी अधिकारियों के संबद्धीकरण के वैधानिक आधारों की विस्तृत जांच की मांग की गई है कि आखिर किस नियम के तहत इन्हें इनकी मूल संस्थाओं से गायब रखकर दूसरी जगह अटैच किया गया है।
क्या है ‘विशेष तकनीकी सेल’ का सच?
इसके साथ ही, विभाग के अंतर्गत गुपचुप तरीके से गठित किए गए ’विशेष तकनीकी सेल’ (Special Technical Cell) की उपयोगिता और कार्यप्रणाली पर भी बड़ा संदेह जताया गया है। गठन के बाद से अब तक इसके द्वारा दिए गए कुल ‘शून्य’ परिणामों और सरकारी धन व संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर इसकी कड़ाई से जांच की मांग की गई है।
माननीय मुख्यमंत्री से आर-पार की मांग: पारदर्शी जांच कराने की गुहार
इस स्थानांतरण महाघोटाले और प्रशासनिक अराजकता को लेकर उत्तर प्रदेश के मुखिया से सीधे हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि राज्य की “जीरो टॉलरेंस” नीति की गरिमा बची रहे।




